Sunday, February 23, 2014

Khayal #3




कभी तू सुकून देती रौशनी सा है
कभी मेरे होटों पर मुस्कुराती ख्वाइशों सा है

कभी मेरे सपनो कि उड़ान सा है
कभी मेरे दुआओं कि शाम सा है

सुन्हेरी धूप में खिलते मेरे एक ख्वाब का हिस्सा है तू
गुलाबी ठन्ड कि एक सुबह का किस्सा है तू


न चाहतो के दायरो सा , ना मोहब्बतो के सिलसिलो सा
फिर भी कही से कुछ कुछ.………… मुझसा  है तू

……… 

Monika 

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