Tuesday, January 31, 2012

Taare

तारो  की  जगमगाहट  में  , वोह  एक  तारा  अलग  सा  है  !!
सब  से  ज्यादा  रोशन  और  सब  से  ज्यादा  सुनेहरा  है !!

अक्सर  सब  से  अलग  एक  किनारे  खड़ा  नज़र  आता  है !!
मुजह  से  अपनी  बातें  और  अपने  सपने  बाटता  है !!

भीड़  का  हिस्सा  नहीं  , अपने  लिए  भीड़  जुटी  देखना  चाहता  है !!
चाँद  की  तरह  चमकने   के  सपने  आपनी  आँखों  में  पालता  है  !!
  
वोह  आपनी  आँखों  से  हर  वक़्त  मुजहे  देखता  है  !!
मेरी  आँखों  की चमक   का  देर  रात  तक  इंतज़ार  करता  है  !! 

बादल   जब  अपना  कोहरा  बीछाते  है
तो  वोह  अपने  किस्मत  के  तारो  से  लड़ झगड़  कर
 उस  कोहरे  से  बहार  निकल  ही  आता  है !! 

क्युकी  टूट  कर  गिरना  उसकी  किस्मत  नहीं  है !!
अपनी  मुस्कुराहट की रौशनी बिखेरना ही उसकी  नियति है !!

.....Monika

Over the years i have written poems specifically for few friends, but not for all. So as part of my New year resolution ,am going to dedicate one poem to each of you. This one is for my FB friend  ;)   




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