तेरी यह ख़ामोशीया मुझे उलझाने लगी है.
दूर रह कर भी तुझे मुझ तक लाने लगी है.
मुझ से कुछ अल्फाज़ उधार लेले .
आपनी खामोशियों को , मेरी जुबान देदे .
शायद तू भी सुन पाए, वोह जो मैंने सुना है .
तेरे मन का इक तार जो आज भी गुनगुना है .
उसका हाथ थामे कभी दो कदम चल के तो देख .
अपनी खामोशियों के खली पन्हों को ,पलट के तो देख .
इक मुस्कराहट आज भी तेरे इंतज़ार में खामोश खडी है .
अपने खयालो में तेरे साए साथ ले कर चली है .
आगे अब साथ ....तुज्हे ही निभाना होगा .
अपने लवजो से ..... इस ख़ामोशी के खालीपन को .....तुझे ही मिटाना होगा .
....... Monika :)
दूर रह कर भी तुझे मुझ तक लाने लगी है.
मुझ से कुछ अल्फाज़ उधार लेले .
आपनी खामोशियों को , मेरी जुबान देदे .
शायद तू भी सुन पाए, वोह जो मैंने सुना है .
तेरे मन का इक तार जो आज भी गुनगुना है .
उसका हाथ थामे कभी दो कदम चल के तो देख .
अपनी खामोशियों के खली पन्हों को ,पलट के तो देख .
इक मुस्कराहट आज भी तेरे इंतज़ार में खामोश खडी है .
अपने खयालो में तेरे साए साथ ले कर चली है .
आगे अब साथ ....तुज्हे ही निभाना होगा .
अपने लवजो से ..... इस ख़ामोशी के खालीपन को .....तुझे ही मिटाना होगा .
....... Monika :)
love u monu for this awasome poem. This is really fantastic ***** five star from me.
ReplyDeleteThanks swappy !
ReplyDeleteise padh kar toh khamoshiyaan bhi bol uthengi :)
ReplyDeleteawesome monu...
ReplyDelete@sunita , @mahi : Thanks !!
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